नई दिल्ली। विपक्षी सदस्यों ने मतदाताओं की डुप्लीकेट ईपीआईसी संख्या, परिसीमन प्रक्रिया को लेकर चिंता और तमिलनाडु को केन्द्र से उसके हिस्से के राजस्व के भुगतान की मांग जैसे मुद्दों को लेकर राज्यसभा में जोरदार हंगामा किया जिसके चलते सदन की कार्यवाही बारह बजे तक स्थगित करनी पड़ी थी ।
उप सभापति हरिवंश ने मंगलवार को विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद कार्यवाही शुरू करते हुए कहा कि उन्हें नियम 267 के तहत कार्यस्थगन प्रस्ताव के 21 नोटिस मिले हैं। उन्होंने कहा कि ये नोटिस डुप्लीकेट ईपीआईसी संख्या, परिसीमन प्रक्रिया को लेकर चिंता और तमिलनाडु को केन्द्र से उसके हिस्से राजस्व राशि के भुगतान जैसे मुद्दों पर चर्चा कराने के लिए दिये गये हैं।
उन्होंने कहा कि नियम 267 के बारे में पहले भी कई बार व्यवस्था दी जा चुकी है। सभापति ने इस संबंध में आठ दिसम्बर 2022 को विस्तार से व्यवस्था दी थी और बाद में कई मौकों पर इसे दोहराया भी गया है। उन्होंने कहा कि सदस्यों के नोटिस उस व्यवस्था के अनुरूप नहीं हैं इसलिए इन्हें स्वीकार नहीं किया गया है। साथ ही उन्होंंने कहा कि सदस्य किसी और नियम के तहत इन मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं।
इसके बाद हंगामे के बीच उन्होंने शून्यकाल शुरू कर दिया लेकिन विपक्ष के सदस्य आसन के निकट आकर शोरगुल करने लगे थे। हरिवंश ने सदस्यों से अपनी जगहों पर जाकर कार्यवाही सुचारू ढंग से चलने देने का अनुरोध किया लेकिन सदस्य अपनी मांग पर अड़े रहे। विपक्षी सदस्य यह भी मांग कर रहे थे कि नेता विपक्ष को अपनी बात रखने का मौका दिया जाना चाहिए। सदन में अव्यवस्था का माहौल बनते देख उप सभापति ने 11 बजकर 21 मिनट पर कार्यवाही बारह बजे तक स्थगित कर दी थी । इससे शून्यकाल की कार्यवाही पूरी नहीं हो सकी।
परिसीमन प्रक्रिया और तीन भाषा के फार्मूले के विरोध में दक्षिण के सांसद आज सदन में काला कुर्ता पहनकर आये थे।
इससे पहले हंगामे के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राजीव भट्टाचार्जी ने शून्यकाल के दौरान त्रिपुरा में एम्स जैसा सुपरस्पेशिलीटी अस्पताल बनाये जाने की मांग की थी।
द्रमुक के आर गिरिराजन ने परिसीमन प्रक्रिया का विरोध करते हुए कहा कि यदि ऐसा होता है तो तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों को लोकसभा सीटों का नुकसान होगा। यह गंभीर चिंता का विषय है और तमिलनाडु जैसे राज्यों के लोगों के अधिकार पर कुठाराघात है। परिसीमन की प्रक्रिया न्याय पर आधारित नहीं है और तमिलनाडु इसे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य के सभी राजनीतिक दल इसके लिए तैयार नहीं हैं और वे चाहते हैं कि 1971 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन की प्रक्रिया करें।
भाजपा की धर्मशिला गुप्ता ने बिहार के दरभंगा में मेट्रो परियोजना की लंबाई 18 किलोमीटर से बढाकर 22 से 24 किलोमीटर करने की मांग की।